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जीवन संगिनी बिल्ली 🐱

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 जीवनसंगिनी जीवन में कुछ ऊंच नीच अगर हो जाये कोई बात जो तुमको बुरी लगे कोई गलती मुझसे हो जाये याद रहे बस वो पल जिसमें वचन दिया हम दोनों नें इस जीवन की कठिनाई में संयम कभी न तोड़ेंगे चाहे कुछ भी हो जाये हम साथ कभी न छोड़ेंगे। हम तुम दूर रहे हैं अक्सर पर दिल में तुम्हीं समायी हो स्वप्न हो तुम जो रात को देखा तुम दिन में मेरी परछाई हो विरल पुष्प तुम दुर्लभ पंछी शील सरित तरुणाई हो इस रिश्ते में तुम भी मैं भी तिन तिन सपने जोड़ेंगे चाहे कुछ भी हो जाये हम साथ कभी न छोड़ेंगे. जब मैं होऊंगा छप्पन का और तुम होगी एक्क्यावन की देख के नाती-पोतों को फिर याद करेंगे यौवन की बात करेंगे बच्चे अपनी रिश्ते अपने पावन की किसी शाम फिर नदी किनारे याद से यादें जोड़ेंगे चाहे कुछ भी हो जाये हम साथ कभी न छोड़ेंगे। Happiest Birthday Billi 🍰🍰😍😍💘💘🐱🐱🎂🎂🎂🍬🍬 तुम्हारा प्रिय बिल्लू 🐱

स्त्री होना क्या होता है ??...❣️🇮🇳

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हम नहीं जानते हैं स्त्री होना क्या होता है..!!:-   हम नहीं जानते हैं स्त्री होना क्या होता है! शायद जानना जरूरी भी नहीं है। पुरूष हों या स्त्री दोनों ने स्वयं का होना चुना नहीं है।  हमने केवल अम्मा को देखा है। बचपन से अब तक, जिस दिन अम्मा घर में नहीं होतीं ज़िंदगी उलझ जाती है। अम्मा के हाथों बने खाने के सिवा कुछ भी खाकर मन नहीं भरता है। अम्मा न हों तो हमारे कपड़े मैले रह जायें, अम्मा न हों तो हमारी कपड़े मिले भी न।  स्त्री के बिना संसार चलता है या नहीं, यह बहस ही व्यर्थ लगता है हमें। स्त्री के बिना घर नहीं चलता है, यह हम जानते हैं। अम्मा लट्टू हैं। घर की धूरी पर कभी इधर, कभी उधर नाचती रहती हैं। अम्मा लाख थकीं हो, लाख बीमार हों, एक बार कहने पर चिल्लाती जरूर हैं पर जो चाहिए वो लाकर देती हैं। अम्मा कभी नहीं बोलीं उन्हे क्या चाहिए। शायद अपनी बसायी गृहस्थी में सबकी इच्छायें पूरी करते-करते अम्मा अपनी इच्छायें भूल गयी हैं। इस दुनिया में अम्मा जैसी करोड़ों स्त्रियाँ हैं जिनके सपने उनके नहीं है। जिनकी इच्छायें दूसरों की हैं। जो स्वयं में ही शेष नहीं हैं।  हमने अम्मा को कभी स्...

घाट और मैं ❣️

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 घाट और मैं  उन दिनों हम अक्सर ही घाट पर होते थे। पंडित कभी साथ नहीं था मगर श्री अक्सर होता था। कभी-कभी हम अकेले होते थे। हाथ में एक डायरी, जेब में एक पेन और बेतरतीब से ख़याल हमेशा रहते थे, जब भी अकेले हुआ करते थे।  ऐसा कई दफे हुआ था कि कुछ लोग रात में काॅल करते थे यह जानने को कि शायद हम घाट पर मिले। हम हमेशा कहते कि हम घर पर हैं। अकेले होना हमने चुना था। किसी अंधेरे हिस्से में जहाँ बस थोड़ी सी रोशनी हो, वहीं बैठ कर घंटो लिखते थे। एक जरूरी बात यह है कि घाट पर बैठकर कोई प्रेम के बारे में नहीं लिखता है। एक कुल्हड़ चाय बगल में होती थी। कुल्हड़ और चाय दोनों हर आधे घंटे पर बदल जाती थीं।  एक बच्चा था, जिसका नाम हमें याद है। वह अक्सर रात 11 के बाद काॅल करता और घंटो बातें करता। हम सुनते रहते, डायरी बंद रहती थी। वह उदास होता था, हर रोज और हर रोज हम उसे खींच कर ले आते, जिन्दगी की ओर। क्योंकि हम जिन्दा थे और हमें पता था कि जिन्दा रहना जरूरी नहीं, जिन्दगी का होने जरूरी है।  रात और गहरी होती। भीड़ आहिस्ता से छंट जाती, सन्नाटे पसर जाते थे। ऐसे वक्त में हम सीढ़ियों से नीचे गंग...

और हम भी ......❣️❣️

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 और हम भी... ❤ तुम्हे ये तारीख याद है? अग़र नहीं भी है तो उदास न होना तुम। हम हैं न; सब याद रखने को... सालों पहले अचानक से तुम आयी थी। प्यार-व्यार कुछ सोचा नहीं था, लेकिन एक रोज हम साथ थे। तुम्हे याद है न जब हमने कहा था; तुमसे इश्क़ है हमें। अग़र नहीं भी है तो उदास न हो तुम। सालों गुज़र गये तुम्हारे साथ और लगा था जैसे लम्हे की बात हो। इस एक तारीख में ही जब्त है वो सारा सफ़र। मालूम है तुम्हे; सालों पहले उस रोज जब बस स्टैंड पर तुम बस के भीतर थी और हम खिड़की पर। हाँ, तुम्हे कहना है कि हम वहाँ भीतर तुम्हारे साथ बैठ सकते थे लेकिन फिर तुम्हारा हाथ छोड़ते भी कैसे! उस एक दिन तुम्हारे शहर को जाती बस की उस खिड़की पर बहते तुम्हारे आंसू और हमारी भीगती हथेली के बीच जो कुछ भी था, वही हमारा प्यार था। बहुत रोये थे उस दिन हम पर तुम्हे एहसास तक न होने दिया था और फिर तुम्हारी बस आगे बढ़ गयी और हम उसे देखते रहे थे दूर, बहुत दूर... तुम्हारा शहर को जाते हुये।  अग़र तुम्हे याद नहीं भी है तो उदास न होना तुम। देखो! ये रात, कितनी गहरी होती जा रही। तुम्हारे बाद ये रातें बेहद लम्बी हो गयी हैं। वह चाँद, ज...

मोहब्बत एवं धोखा ..... By Krishna Singh Rajput Ji

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मोहब्बत और धोखा By :- Krishna   हिम्मत नहीं रही अब मुझ में थोड़ी भी तुझसे उलझने की तू कर दे इशारा जरा  मैं भी शांत समुंदर बन जाऊंगा। तू साबित कर दे बेगुनाही अपनी खुद को गुनहगार बना मैं सबकी नजर में क़ातिल बन जाऊंगा। तू मिला ले मुझसे अपनी फरेबी नजरें एक रोज समाने बैठकर तेरी आँखों को पढ़कर मैं लोगों को पढ़ लेने का अपना हुनर भूल जाऊंगा। तू दे दे वजह मुझे बेमिसाल नफरत की चल वादा रहा मेरा  छिड़ी मोहब्बत की बातें कहीं, तो मैं उस महफ़िल की सब से बड़ी दुश्मन बन जाऊंगा। तू नजरअंदाज कर जा मेरे आसूँओं की नमी को देता हूँ तस्सली तुझे मैं आँखों को अपना सूखा रेगिस्तान बना जाऊंगा। तू बदल के देख ले अपना ठिकाना गली की बात छोड़ शहर को बदल मैं तेरे शहर का नाम तक अपने लब से मिटा जाऊंगा। तू बना ले अपनों को ग़ैर जितना ग़ैरों को अपना बना मैं तुझसे बेहतर सभी से रिश्ते निभा जाऊंगा। तू सोया कर हर दिन अजनबियों की बाहों में थाम किसी के हाथों को मैं उसकी कंधे पर सिर टिका ये जिंदगी बिता जाऊंगा। तू मत दिखा अपनी सच्चाई का सबूत खोल के कई परतें अभी तेरे करतूतों की मैं तुझे मुहब्बत के नाम पर धोखा लिख जाऊंगा। @krishna...

फूल हरसिंगार के! ❤️❤️ By :- KRISHNA SINGH RAJPUT JI

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 रूप निश्चल प्यार के, फूल हरसिंगार के! रात भर बरसे जो मन की देह पर प्रेम की मैं चिर जयंती हो गयी श्वेतवर्णा मैं दुपट्टा ओढ़कर ख़ुशबुओं जैसी अनंती हो गयी मायने अभिसार के, फूल हरसिंगार के! जल रही है बल्ब वाली रौशनी किंतु मैं रौशन हूँ इसके रूप से पत्तियों की लोरियाँ सुन हो गयी दूर पीड़ाओं की निर्मम धूप से गीत हैं मल्हार के, फूल हरसिंगार के! भोर होते ही लगा है घास पर क्रोशिये के बुन गए रूमाल हैं सर्दियों का आगमन ये कह रहा ये मेरी प्यारी धरा की शॉल हैं वर हैं ज्यों उस पार के, फूल हरसिंगार के! ~कृष्णकांत🌿 @krishnasinghrajputji #sksmedics

Tum kr paaogi kya ? By krishna singh rajput ji

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जब कभी हम  हम ना रहें  तो यूँ ही मुझे बहालाओगी क्या, जब सब करेंगे चाँद की बातें  तो  बस तभी तुम सूरज मुझे दिखलाओगी क्या, हर तरफ होगा अँधेरा घना  तो  तभी तुम जरा आकर एक उम्मीद की किरण बन जगाओगी क्या, सब जा रहे होंगे जिंदगी से मेरी  तो  तुम आकर मुझ प्यार से गले लगाओगी क्या, मैं रोऊँ जो कभी जी भरकर कहीं पे  तो  मुझे मेरे आँसुओं की कीमत बताओगी क्या, कभी बातें जो छिड़ेंगी मेरे क़त्ल की  तो  उस वक़्त तुम बन मासीहा मुझे बचाने आओगी क्या, तपेगी जेठ की दुपहरी जब सारे शहर को जलाने तो  उस तपिश में तुम मुझ से मिलने नंगे पाँव दौड़ें आओगी क्या, बरसेगा जब सावन धरती की प्यास बुझाने  तो  थोड़ा सा तुम आकर मेरी आस बन मुझे हंसाओगी क्या, जब हल्की सी देगी दस्तक मौसम की मिज़ाजी वो गुलाबी सी ठंडक  तो  मुझे तुम आकर बस अलिंगबद्ध कर जाओगी क्या, जब गिरेगी वो शीतलहर में कोहरे की चादर  तो  तुम बनकर गर्माहट पूरे मुझ में सिमट जाओगी क्या, कभी ना जो रहें दुनियां में हम  तो  मेरे शब्दों को अपने अल्फाजों से मिला  मुझे पू...

मुमकिन :🙏🙏

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 ◆मुमकिन◆ मुमकिन हैं , एक दिन तन्हा जीना सीख जाऊंगा , भरी रौ में पैदल ही चलना जान जाऊंगा ! ना होगी तब हमें किसी साथी की जरूरत , खुद को इतना समृद्ध बनाऊंगा ! सजाऊंगा , खुद की महफ़िल लोगों को बुला के , ना किसी का एहसान उठाऊंगा ! अपनी मंजिल को पा एक दिन , मुझ पे उठने वाली हर नज़र को झुकाऊंगा ! अपनी ओर , आने वाली हर नकामी की हवा को , दूर से ही शिकस्त दे जाऊंगा ! जो चलेगी हवा हमें उलझाने को , तो उसका रूख मोड़ने को , समुंदर बन जाऊंगा ! दिया जो किसी ने , हमें दीवानी का तमग़ा , तो डूबकर किसी की मोहब्बत बन जाऊंगा ! दे ये ज़िंदगी हमें गम चाहे जितने , मैं अपनी मुक़दर में , खुशियाँ खुद लिख जाऊंगा ! @krishnasinghrajputji #sksmedics @krishna

बुलबुले : 😑

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◆ बुलबुले ◆ तुम ना , सच्ची किसी बुलबुले से थे , और  बुलबुले कहाँ ठहरा करते हैं । पल में रूठना ,  पल में मानना , खुद ही उलझना , और  खुद से ही सुलझना । मेरे बुलाने पे ना आना , और  कभी बिन कहे ही आ जाना । जिद्द करना तुम्हारा , और  उस पे शांत रहना हमारा । फिर तुम्हारे नखरे भी उठाना , और  हर घड़ी तुम्हें बहलाना । बच्चों सी थी बातें तुम्हारी , मेरे इशारों को , वो तुम्हारा ना समझना , और  कभी पल भर में ही समझकर , साथ खिलखिलाना । बुलबुले कहाँ एक जगह ठहरते हैं , वो गोल सा बन उड़ जाते हैं , मदमस्त हवाओं में , आसमानों में कभी अपना घर बनाने , करने को अठखेलियां , ये बुलबुले ना , नुका-छुपी करते हैं बहुत । ठहराव नहीं इन बुलबुलों में , जैसे याद हैं ,  तुम करते थे मुझसे छिप कर । ठीक वैसे ही तुम भी ना ठहरे , क्योंकि तुम ना , सच्ची किसी बुलबुले से थे , और  बुलबुले कहाँ ठहरा करते हैं । @krishna #sksmedics #krishnasinghrajputji

Sab ladka log ek jaisa hota h kya ?!?

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कोई तुम्हें रुलाके चला जाता है , पर कोई तुम्हें दर्द मे भी हसाता है ना ? कोई तुम्हें गंदी निगाहों से देखता है , तो कोई तुम्हें अपनी निगाहों से सवारता भी है ना ? कोई तुम्हारे मेसेज को जानबूझकर अंदेखा करता है , पर कोई तुम्हारे मेसेज का घंटो इंतजार करता ही हैना ? कोई तुम्हें जिंदगी भर का दुःख देता है , पर कोई तुम्हें अच्छी यांदे देता हैना ? कोई तुम्हारे साथ दरींदे जैसा बर्ताव करता है , पर कोई तुम्हे बाप और भाई की तरह प्यार करता है ना ? कोई नशे की हालत मे अपने घरवालों को परेशान करता होगा , पर कोई अपने घरवालों को भूल बाॅर्डर  पर जान दे रहा होता है ना ? तो बताईये सब लडके एक जैसे होते है क्या ? ? ? @krishna @sksmedics #sksmedics #krishnasinghrajputji

#justicefor_________

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  #JUSTICEFOR______ ये खाली हर रोज अलग नामों से भरा रहा रहता है, कभी कोई तो कभी कोई ... कानून मर रहा है न्याय मर रहा है सरकार सो रही है इंसानियत खत्म हो गयी है,जैसे न जाने कितने हैशटैग चलते है । गुस्सा ट्विटर से फेसबुक तक हर सोशल मीडिया मंच पर फूटता है , नारे लगते है कैंडल मार्च निकलता है। कुछ ग़लतियाँ भी निकलते है , समाज परिवार या फिर उन औरतों की , और न जाने कितना कुछ । अरे हाँ ! कुछ माँ बहन की गालियों के साथ ही उन्हें न्याय दिलाने की बात भी करते हैं । चैनलों पर बहस होता है, जहाँ अपराध के कारण , उसे रोकने के उपाय से ज्यादा आरोप प्रत्यारोप होता है।नारे लगते है गुस्सा फूटता और  बस ये चलता रहता है । कभी कुछ नियम कानून भी बनते है , और फिर कुछ दिन में सब शांत हो जाता है, सड़के और चौराहें सब खाली और शान्त हो जाते हैं, । हाँ ! खबरों में इन घटनाओं से ज्यादा हंगामे की खबरें दिखाई जाती है, लोगों की भीड़ ने क्या किया यह दिखाया जाता है और इन सब मे खो जाता है इन घटनाओं का सच । बदलता तो भी कुछ नही हैं , राजनीतिक पार्टियाँ अपना फायदा नुकसान देखने मे एक दूसरे को गलत ठहरातें है। कानून अपना काम ...

☹️खुद को मर्द कहने वाले ,एक महिला की इज्ज़त से खेल जाते हैं ।☹️

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एक स्त्री की आबरू को, भरे बाजार छलनी कर जाते हैं, खुद को मर्द कहने वाले, एक महिला की इज्ज़त से खेल जाते हैं। खुद की हवस को मिटाने के लिए, दूसरे की बेटी की बलि चढ़ाते हैं, खुद को मर्द कहने वाले, एक महिला की इज्ज़त से खेल जाते हैं। कभी महिला दिवस,तो कभी बेटी दिवस मनाते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा में कभी कोई कदम नहीं उठाते हैं, खुद को मर्द कहने वाले, एक महिला की इज्ज़त से खेल जाते हैं। एक अकेली औरत पर, वो अपना बल हमेशा दिखाते हैं, बलात्कार कर उसका, उसे मरने को छोड़ जाते हैं, खुद को मर्द कहने वाले, एक महिला की इज्ज़त से खेल जाते हैं। # justiceforall # justiceforallgirls @कृष्णा @krishna 

मां ❤️ मेरी मां आप सबकी मां

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बेसन की सोंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी माँ याद आती है चौका-बासन चिमटा फुकनी जैसी माँ बाँस की खुर्री खाट के ऊपर हर आहट पर कान धरे आधी सोई आधी जागी थकी दोपहरी जैसी माँ चिड़ियों के चहकार में गूंजे राधा-मोहन अली-अली मुर्ग़े की आवाज़ से खुलती घर की कुंडी जैसी माँ बिवी, बेटी, बहन, पड़ोसन थोड़ी थोड़ी सी सब में दिन भर इक रस्सी के ऊपर चलती नटनी जैसी माँ बाँट के अपना चेहरा, माथा, आँखें जाने कहाँ गई फटे पुराने इक अलबम में चंचल लड़की जैसी माँ @कृष्णा @krishna © Krishna

Nothing can be changed.🌹

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बहुत कुछ बदला लेकिन वो दिल नहीं...  पता है तुम्हे, मैं चाहता हूं सब पहले जैसा हो। हाँ, मैं खुश तो नहीं था पर भीतर सब थमा हुआ था, इतनी बेचैनी नहीं थी। जबकि तुम अब भी नहीं हो। लेकिन तुम आयी थी... ये सच करैले से ज्यादा कड़वा है।  जिन्दगी का वो दौर बेशक खूबसूरत था लेकिन गुजर गया सब। बहुत कुछ बदला तब से, मेरी दाढ़ी घनी हो गयी और तो और सब कहते हैं मैं समझदार हो गया हूं। लेकिन कोई नहीं जानता कि वक्त से पहले हो गया हूं। अब पढ़ने की जरूरत नहीं, सपने बदले नहीं, बल्कि खत्म हो गये तुम्हारे जाने के बाद। डायरी के वो हिस्से जिनमें तुम्हारा जिक्र था, उन हिस्सों की सारी स्याही धुल गयी। यकीन मानो मेरा, बहुत कोशिश की थी आंसूओं को रोकने की लेकिन..... वो....  बहुत कुछ बदला लेकिन वो दिल नहीं.... हाँ अब कहोगी कि मुझे ही ज्यादा गुस्सा आता था, जानता हूं, पर तुम तो सब समझती थी न। अकेला इंसान सिर्फ गुस्सा ही तो करता है, कमरे की दीवारों पर, आसमानी रंगो पर... पर तुम्हारे साथ भी मैं अकेले रह गया इतनी शिकायत रहेगी हमेशा। अब तो तुम हो भी नहीं, हाँ कि गलती तुम्हारी नहीं थी पर इक दफे सोचना कि क्या सारा गु...

एक रोज़ जब तुम ढूंढोगी मुझे ☹️

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एक रोज जब ढूंढोगी तुम मुझे एक रोज़ जब ढूंढोगी तुम मुझे, इन बिखरे बंद दरवाजे में। महसूस करोगी मेरी आहटों को, उन हवाओं के सरसराहट में। ढूढ़ोगी मेरी हँसी को उस उजली-सी धूप में , कभी शायद महसूस भी करोगी मेरी मौजूदगी तुम साथ अपने उन अकेले रास्तों पर । बीते पल के उन हर हसीन लम्हों को जब तुम याद करोगी एक रोज़, औऱ ढूढ़ोगी 'हम' को उस पल में। मैं मिलूँगा वही वैसे ही तुम्हें निहारते हुये एकटक उन सितारों के बीच से, उन सितारों के बीच से....।।।                                               © तुम्हारा कृशु (krishna)

Dekho , Tum Laut Aana ❤️

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 देखो, तुम लौट आना। जब बारिश की आखिरी बूंद, आसमान पोंछ चुकी हो। जब बल खा कर चली पुरवाई, रूठ कर लौट जाए अपने घर। जब मिट्टी में दफ़्न छोटे दाने, अंगड़ाईयाँ लेते हुए अँकुराने लगे।  तुम लौट आना। जब दिन अपना लजाया चेहरा, रात की ज़ुल्फ़ों की आड़ में छिपा ले। जब हज़ारों टिमटिमाते जुगनू, रात की ज़ुल्फ़ों में डेरा बना लें। जब रात, अपने ज़ुल्फ़ों में सजाए हुए, एक सफेद फूल, खूब इठलाती फिरे।  तुम लौट आना। जब एक धीमा मद्धम उदास संगीत , बन्द खिड़कियों से धीमे धीमे रिसने लगे। जब चिराग़, ले अलसाई अंगड़ाई, हौले हौले हर कोने में जाग उठें। जब मेरी देहरी का टिमटिमाता दीया, रोशन करना चाहे तुम्हारे लौटने की राह। तुम लौट आना। जब बादलों से झांकने लगे, तेज़ सुफ़ेद रौशनी की चादर। जब आँखों मे एक एक कर, जम जाएँ आँसुओं की कई परतें। जब तंग आ कर तन्हाईयों से, नमी लिए गूँज जाए एक सदा। तुम लौट आना, देखो, तुम लौट आना। तुम्हारा कृषु ( krishna) @krishna ©™ Krishna

माँ :- एक अद्भुत स्वरूप

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मैं प्रेम में पड़ कर किसी  प्रेमिका का अपनी कविताओं में चित्रण करने से पहले वर्णित  करूँगा अपनी माँ को उन कविताओं  में जिनके प्रेम ने मुझे बनाया हैं  किसी नाज़ुक पौधे से वट वृक्ष  जो कि उठा सके जिम्मेदारियां उसकी  ताकि वह कविता मुझे स्मरण कराती रहे और बचाये रखे मुझे मेरे ही अहं से उसको किसी भी रूप में अपमानित  और भम्रित करने से पहले कि मेरी  उत्पति एवं वजूद भी एक औरत (माँ) से हैं जिसका प्रतिबिंब ही मेरी प्रेमिका है।  ©®™ Krishna

सफ़र हमसफ़र

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 अनकहा-सा रह गया जो वो बात अब किससे कहूँ! कौन है यहाँ मेरा भला  जा गले किसके लगूँ! थोड़ी बहुत नादानियाँ थी क्या पता था... कि रूठ जायेंगे मुझसे मेरे किनारे मैं समंदर गमों का मुझे किनारा ना मिला जो खोया सफ़र में मैंने मुझे दोबारा ना मिला... ❤ Copyright@KRISHNA

Zindgi bhi kaha thamti hai ...

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 जिंदगी भी कहाँ थमती है, किसी एक के चले जाने से, चंद दिन आँसुओ में लिपट, खुद को समझा लेते हैं हम, याद आए तो कभी मुस्कुरा, कभी अश्क छलका देते है हम, बीतें लम्हों का एक संग्राहिक बना लेते है हम, हाँ! खुद को समझा लेते है हम, सबकी बातों को सुन बस  ताज्जुब होता है तब, चले जाने के बाद हर इंसान को अच्छा मान लेते है सब, सहानुभूति के साथ अपनी कहानियाँ बता जाते है जब, न चाहते हुयें भी दर्द बहुत गहरा लगता है तब, हाँ ! पर अब खुद को समझा लेते है हम.... @krishna

"ख़्वाहिशों से भरा इंतजार का ख़त"

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  " ख़्वाहिशों से भरा इंतजार का ख़त " कुछ ख्वाहिशें हैं जो शायद पूरी करना भूल गया था। तुम्हारे साथ कि इतनी आदत कब लग गयी जान ही नहीं पाया, कभी सोचा ही नहीं की अपनी वो ख्वाहिशें पूरी कर लूँ, पता नहीं कब जाना हो जाये तुम्हारा। नहीं आया ख्याल कभी तुम्हारे जाने का,  तुम्हारे साथ रहने के बारे में ही सोचा हमेशा, उसी पल में जिया। काश! एक बार तो सोचा होता कि अगर तुम चली गयी तो?? ख़ैर,  आज 193 दिन 7 घण्टे और शायद 40 मिनट गुजर गये हैं तुम्हारी आवाज बिना सुने" तुम्हारे मोबाइल में इनबॉक्स में पड़ा वो मैसेज बयां करता है, कि कैसे गुजरा है ये वक़्त कभी मै coca cola ya Sprite पी लेता तो तुम्हारे कभी ख़त्म ना होने वाले लेक्चर्स मुस्कुराते हुए सुनते रहता था, मुझे हँसते हुए देख कर तुम्हारा पारा और चढ़ जाता था। फिर पीठ पे एक साथ आठ दस मुक्के बरसाने के बाद तुम कहती थी, कि खाओ कसम अब से नहीं पियोगे, और मैं इस कसम से बचने के लिये तुम्हारे चश्मे की तारीफ करने लगता और तुम भी बताने लगती कल ही तो लायी हैं दीदी। हम दोनों जानते थे कि झूठी कसम मैं कभी खाऊंगा नहीं और इससे सच भी बदलेगा नहीं, तो बात ही बदल द...