सफ़र हमसफ़र
अनकहा-सा रह गया जो
वो बात अब किससे कहूँ!
कौन है यहाँ मेरा भला
जा गले किसके लगूँ!
थोड़ी बहुत नादानियाँ थी
क्या पता था...
कि रूठ जायेंगे मुझसे
मेरे किनारे
मैं समंदर गमों का
मुझे किनारा ना मिला
जो खोया सफ़र में मैंने
मुझे दोबारा ना मिला... ❤
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