" ख़्वाहिशों से भरा इंतजार का ख़त " कुछ ख्वाहिशें हैं जो शायद पूरी करना भूल गया था। तुम्हारे साथ कि इतनी आदत कब लग गयी जान ही नहीं पाया, कभी सोचा ही नहीं की अपनी वो ख्वाहिशें पूरी कर लूँ, पता नहीं कब जाना हो जाये तुम्हारा। नहीं आया ख्याल कभी तुम्हारे जाने का, तुम्हारे साथ रहने के बारे में ही सोचा हमेशा, उसी पल में जिया। काश! एक बार तो सोचा होता कि अगर तुम चली गयी तो?? ख़ैर, आज 193 दिन 7 घण्टे और शायद 40 मिनट गुजर गये हैं तुम्हारी आवाज बिना सुने" तुम्हारे मोबाइल में इनबॉक्स में पड़ा वो मैसेज बयां करता है, कि कैसे गुजरा है ये वक़्त कभी मै coca cola ya Sprite पी लेता तो तुम्हारे कभी ख़त्म ना होने वाले लेक्चर्स मुस्कुराते हुए सुनते रहता था, मुझे हँसते हुए देख कर तुम्हारा पारा और चढ़ जाता था। फिर पीठ पे एक साथ आठ दस मुक्के बरसाने के बाद तुम कहती थी, कि खाओ कसम अब से नहीं पियोगे, और मैं इस कसम से बचने के लिये तुम्हारे चश्मे की तारीफ करने लगता और तुम भी बताने लगती कल ही तो लायी हैं दीदी। हम दोनों जानते थे कि झूठी कसम मैं कभी खाऊंगा नहीं और इससे सच भी बदलेगा नहीं, तो बात ही बदल द...
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